Wednesday, November 4, 2015

भारत . दक्षिण अफ्रीका टेस्ट श्रृंखला से जुड़े आंकड़े

     रिष्ठ पत्रकार सम्मानीय श्री पदमपति शर्मा जी का सवाल था कि आखिर मैंने आंकड़ों की दु​कान सजानी क्यों बंद कर दी। पदमपति सर हमेशा प्रेरित करते हैं। यह शायद उन्हीं की प्रेरणा है कि जिस खेलराज ब्लाग को लगभग बंद कर दिया था उसे अब नये नाम 'आंकड़ेबाज' से शुरू कर रहा हूं। आंकड़ों की इस दुकान में सबसे पहले भारत और दक्षिण अफ्रीका की टेस्ट श्रृंखला जो पांच नवंबर से मोहाली में शुरू हो रही है।

     भारत और दक्षिण अफ्रीका टेस्ट श्रृंखला से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण आंकड़े

1... भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच अब तक 29 टेस्ट मैच खेले जा चुके हैं। इनमें से भारत ने सात और दक्षिण अफ्रीका ने 13 में जीत दर्ज की। बाकी 9 मैच ड्रा रहे। भारतीय सरजमीं पर अब तक 12 टेस्ट मैच खेले गये हैं। इनमें दोनों टीमों ने पांच . पांच जीते हैं जबकि दो मैच अनिर्णीत समाप्त हुए हैं।
2... भारतीय धरती पर दोनों देशों के बीच पांच श्रृंखलाएं खेली गयी हैं। इनमें से भारत ने दो में जीत दर्ज की जबकि दक्षिण अफ्रीका ने एक श्रृंखला जीती। पिछली दोनों टेस्ट श्रृंखलाएं बराबरी पर छूटी थी। ओवरआल 12वीं बार ये दोनों देश किसी टेस्ट श्रृंखला में आमने सामने होंगे। पिछले 11 अवसरों में से दक्षिण अफ्रीका छह बार सीरीज जीतने में सफल रहा जबकि भारत ने दो बार श्रृंखला अपने नाम की। बाकी तीन श्रृंखलाएं बराबर रही।
3... वर्तमान श्रृंखला में माना जा रहा है कि एबी डिविलियर्स भारत को सबसे अधिक नुकसान पहुंचा सकते हैं लेकिन वह हाशिम अमला ​हैं जिन्होंने अब तक भारतीय सरजमीं पर सबसे अधिक धमाल मचाया है। इन दोनों देशों के बीच टेस्ट मैचों में सर्वाधिक 1741 रन सचिन तेंदुलकर ने बनाये हैं और उनके बाद जाक कैलिस (1734 रन) का नंबर आता है लेकिन अमला 1207 रन बनाकर बहुत पीछे नहीं हैं।
4... अमला की निगाह इस श्रृंखला में कई रिकार्डों पर टिकी रहेगी। तेंदुलकर के दोनों देशों के बीच सर्वाधिक रन के रिकार्ड की बराबरी करने के लिये उन्हें 534 रन चाहिए। अमला ने अब तक भारत के खिलाफ पांच शतक लगाये हैं और वह दोनों देशों के बीच सर्वाधिक शतक के तेंदुलकर और कैलिस (सात सात शतक) के रिकार्ड को भी तोड़ना चाहेंगे।
5... अमला हालांकि सबसे पहले दोनों देशों के बीच श्रृंखलाओं में भारतीय सरजमीं पर सर्वाधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज बनना चाहेंगे। अभी रिकार्ड वीरेंद्र सहवाग (924 रन) के नाम पर है। अमला को उनकी बराबरी के लिये केवल 101 रन चाहिए। अमला ने भारतीय सरजमीं पर अभी तक छह मैचों में चार शतकों की मदद से 823 रन बनाये हैं और उनका औसत 102 . 87 है। मतलब वर्तमान श्रृंखला में यदि वह 177 रन बना लेते हैं तो भारतीय सरजमीं पर 1000 या इससे अधिक रन बनाने वाले चौथे विदेशी बल्लेबाज बन जाएंगे। अभी तक क्लाइव लायड (1359), गोर्डन ग्रीनिज (1042) और मैथ्यू हेडन (1027) ही यह कारनामा कर पाये हैं। एक शतक लगाते ही अमला भारतीय धरती पर सर्वाधिक सैकड़े जड़ने वाले विदेशी बल्लेबाज भी बन जाएंगे। अभी लायड, एवर्टन वीक्स, एलिस्टेयर कुक और अमला चारों ने चार चार शतक लगाये हैं।
6... भारत के वर्तमान बल्लेबाजों में चेतेश्वर पुजारा ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ सर्वाधिक 311 रन बनाये हैं जिसमें एक शतक शामिल हैं। विराट कोहली ने भी एक शतक की मदद से 272 रन बनाये हैं।
7... दोनों देशों के बीच टेस्ट मैचों में अब तक केवल चार दोहरे शतक लगे हैं। ये हैं सहवाग (319), अमला (153 नाबाद), डिविलियर्स (217) और कैलिस (201 नाबाद)।
8... किसी एक श्रृंखला में सर्वाधिक रन बनाने का रिकार्ड जाक कैलिस के नाम पर है। उन्होंने 2010.11 में तीन मैचों में 498 रन बनाये थे। अमला ने इससे पहले फरवरी 2010 में दो मैचों में 490 रन ठोक दिये थे। उन्होंने तब तीनों पारियों में शतक जड़ा था। इस तरह से यदि वह मोहाली में पहली पारी में शतक लगाते हैं तो यह उनका भारतीय धरती पर लगातार चौथा शतक होगा।
9... भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच टेस्ट मैचों में अनिल कुंबले ने सर्वाधिक 84 विकेट लिये हैं। वर्तमान गेंदबाजों में डेल स्टेन 63 विकेट लेकर सबसे आगे हैं। कुंबले की बराबरी के लिये उन्हें 21 विकेट चाहिए।
10... दोनों देशों के बीच विकेटकीपर द्वारा सर्वाधिक शिकार का रिकार्ड मार्क बाउचर (60) के नाम पर है। सर्वाधिक कैच कैलिस (23) ने लिये हैं। वर्तमान खिलाड़ियों में डिविलियर्स (15), अमला (10), पुजारा (6) और मुरली विजय (5) का नंबर आता है।

Sunday, August 16, 2015

विराट के नाम खुला खत

प्रिय विराट,
    मुझे आपसे सहानुभूति है। इसलिए नहीं कि गाले टेस्ट मैच में टीम जीत की स्थिति में होने के बावजूद हार गयी। इसके कुछ और कारण हैं। पहली वजह आपसे ही जुड़ी हुई है। आपको अभी टेस्ट टीम का कप्तान बने हुए कुछ महीने हुए हैं लेकिन आपने स्पष्ट संकेत दे दिये कि आप टीम पर से 'धौनी प्रभाव' समाप्त करने के लिये आमादा हो। परि​वर्तन प्रकृति का नियम है लेकिन वह शनै: शनै: होता है। कोई भी कप्तान अपने मनपसंद की टीम गठित करके अपने हिसाब से उसका संचालन करना चाहता है। इसमें मुझे आपत्ति नहीं लेकिन दूध को भी दही बनने में थोड़ा समय लगता है भाई। जिस टीम को महेंद्र सिंह धोनी ने पिछले छह वर्षों से एक ढांचे में ढाल रखा था उसे आप एकदम से दूसरे ढांचे में फिट करना चाहते हो। इसके नकारात्मक परिणाम आपके सामने हैं। आप यह क्यों भूल गये कि टेस्ट मैच जीतने के लिये यदि 20 विकेट लेने होते हैं तो 20 विकेट बचाने भी होते हैं। धीरे . धीरे और परिस्थितियों का आकलन करके प्रयोग करते तो बेहतर होता भाई।  एक कप्तान अपने पहले चार टेस्ट मैचों में चार शतक लगाता है और उनमें से किसी में भी टीम को जीत नहीं मिलती है तो उस कप्तान से सहानुभूति होना स्वाभाविक है। मुझे आपसे सहानुभूति है विराट।
    मुझे आपसे इसलिए भी सहानुभूति है क्योंकि आपके साथ रवि शास्त्री जुड़े हुए हैं। धौनी की ​'विराट छत्रछाया' में उनकी कुछ खास नहीं चली लेकिन अब लगता है कि विराट के साये में उन्हें अपनी बात रखने का मौका मिल गया है। अगर अंतिम एकादश के चयन में उनकी दखलदांजी है, जैसा कि उनकी तल्ख टिप्पणियों से लगा, तो फिर यही आभास होता है भाई कि उन्हें टीम की नहीं मुंबई की चिंता है। वह मुंबई का कर्ज उतारना चाहते है। आपको शायद याद नहीं हो लेकिन एक समय भारतीय क्रिकेट पर मुंबई लॉबी हावी थी। टीम में मुंबई के खिलाड़ियों की भरमार हुआ करती थी। सुनील गावस्कर टीम लेकर न्यूजीलैंड गये हुए थे। सौराष्ट्र के दिलीप दोषी उन्हें पसंद नहीं थे। वह अनफिट हो गये और गावस्कर को मौका मिल गया। उन्होंने मुंबई के अपने एक साथी को एसओएस भेजकर बुलवा दिया। यह साथी कोई और नहीं शास्त्री थे जिन्होंने तब तक केवल सात प्रथमश्रेणी मैच खेले थे। अब इतिहास दोहराया जा रहा है। मुंबई के एक खिलाड़ी (रोहित शर्मा) के लिये सौराष्ट्र के एक खिलाड़ी (चेतेश्वर पुजारा) की बलि दी जा रही है। अफसोस कि इसमें आप खुलकर शास्त्री का साथ दे रहे हैं। यह भूल रहे हैं कि पुजारा वास्तव में टेस्ट विशेषज्ञ हैं और लंबी अवधि के प्रारूप में रोहित से बेहतर बल्लेबाज हैं। यहां पर यदि मैं यह साबित करने के लिये आंकड़ों की बिसात बिछांऊ तो अच्छा नहीं लगेगा। शास्त्री को समझाओ भाई कि अब मुंबई का पहले जैसा दबदबा नहीं रहा और अंजिक्य रहाणे खेल तो रहा है। कभी संजय बांगड़ और भरत अरूण को भी अलग में ले जाकर उनकी राय पूछ लिया करो।
    सहानुभूति का एक कारण यह भी है कि धौनी के संन्यास लेने के बाद आपकी कप्तानी की राह तो आसान हो गयी लेकिन टीम ने एक मंझा हुआ विकेटकीपर बल्लेबाज खो दिया। आपके पास रिद्धिमान साहा है जो इसलिए टीम में है क्योंकि बीसीसीआई में बंगाल लॉबी ऐसा चाहती है। कुछ और भी विकेटकीपर हैं जो बेहतर विकल्प हो सकते हैं। गाले में विकेट के पीछे साहा के प्रदर्शन से तो आप भी संतुष्ट नहीं होंगे लेकिन आपने उन पर छठे नंबर के बल्लेबाज के रूप में कैसे विश्वास कर लिया। एडम गिलक्रिस्ट के नाम और उनके बल्लेबाजी कौशल से तो आप परिचित होंगे। उनकी मौजूदगी के बावजूद आस्ट्रेलिया छह बल्लेबाजों के साथ उतरता था। आस्ट्रेलिया की उस टीम से सीख लेकर अपना गेंदबाजी आक्रमण मजबूत करो। साहा जैसे विकेटकीपरों के रहते आपकी पांच बल्लेबाजों की थ्योरी कारगर साबित होगी, मुझे संदेह है। 
     और हां कप्तानी में अभी नये हो, चाटुकारों से बचना। कोई भी जो आपको माराडोना या पेले बता रहा है उससे दूर ही रहना है। सफलता हासिल करनी हो तो हिन्दी के मुहावरे 'निंदक नियरे राखिये' पर भी गौर कर लेना। ​
     श्रीलंका के खिलाफ बाकी दो टेस्ट मैचों में सकारात्मक परिणाम के लिये शुभकामनाएं।
                                                           एक क्रिकेट प्रेमी