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Friday, April 24, 2015

सचिन ने जन्मदिन पर जमाया शतक तो वार्न ने लिया आटोग्राफ

      जब मैंने 'सचिन के सौ शतक' लिखनी शुरू की थी तो फिर सचिन तेंदुलकर के सैकड़ों के बारे में कई रोचक तथ्य भी जानने को मिले। इन विवरण किताब में किया गया है। तेंदुलकर ने अपने इन 100 शतकों में से एक शतक अपने जन्मदिन पर भी बनाया है। शारजाह में 22 अप्रैल 1998 को तेंदुलकर ने एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की सर्वश्रेष्ठ पारियों में से एक पारी खेली थी लेकिन इसके दो दिन बाद यानि 24 अप्रैल 1998 को भी उन्होंने उसी प्रतिद्वंद्वी आस्ट्रेलिया के खिलाफ शतक लगाया था। भारत ने उनके इस शतक के दम पर खिताब जीता था। तेंदुलकर का वह 25वां जन्मदिन था और आज वह अपना 42वां जन्मदिन मना रहे हैं। इसलिए सबसे पहले तो बल्लेबाजी के बादशाह को जन्मदिन की ढेर सारी शुभकामनाएं।

      तेंदुलकर ने आस्ट्रेलिया के खिलाफ उस दिन 134 रन बनाये थे जिसके लिये उन्होंने 131 गेंदें खेली थी तथा 12 चौके और तीन छक्के लगाये थे। भारत ने शारजाह कप का यह फाइनल मैच छह विकेट से जीता था। उस दिन भी दो दिग्गजों के बीच जबर्दस्त मुका​बला देखने को मिला था। तेंदुलकर के सामने शेन वार्न थे जिनकी प्रतिद्वंद्विता को लेकर मीडिया कई तरह के किस्से गढ़ते रहा है। दर्शक भला कब चुप रहने वाले थे। तेंदुलकर को बल्लेबाजी करते हुए देखने और साथ में उन्हें जन्मदिन की बधाई देने के लिये उस दिन 24 हजार से अधिक दर्शक स्टेडियम में पहुंचे हुए थे। जब वार्न गेंदबाजी के लिये आये तो उनकी मांग यही थी कि तेंदुलकर उन पर छक्का जड़ें। भारतीय बल्लेबाज ने दर्शकों को निराश नहीं किया। ​तेंदुलकर ने वार्न की गेंद पर आगे बढ़कर लांग आन पर दर्शनीय छक्का लगाया था। शतक पूरा करने के बाद उन्होंने वार्न की दो गेंदों पर चौके जड़े थे। मैं यह सब जिक्र इसलिए कर रहा हूं कि मैच समाप्त होने के बाद तेंदुलकर के पास आटोग्राफ लेने के लिये जो व्यक्ति सबसे पहले पहुंचा था वह कोई और नहीं बल्कि शेन वार्न था। उन्होंने अपनी जर्सी पर तेंदुलकर का आटोग्राफ ​लिया था। 
      उस मैच में टोनी ग्रेग कमेंट्री कर रहे थे तो तेंदुलकर के जबर्दस्त प्रशंसकों में शामिल थे। वह सचिन के हर शाट पर लगभग चीखती आवाज में दर्शकों का उत्साह बढ़ा रहे थे। तब पहली बार ग्रेग ने तेंदुलकर की तुलना सर डान ब्रैडमैन से की थी। उन्होंने कहा था, ''ब्रैडमैन के यदि कोई बेहद करीब है तो यह छोटे कद का इंसान है।''
    यह तो थी तेंदुलकर के अपने जन्मदिन पर बनाये गये शतक की कहानी। आपको रिकार्ड के लिये बता दूं कि 24 अप्रैल को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पहला शतक तेंदुलकर ने ही बनाया था। हां जी यह पहला अवसर था जबकि 24 अप्रैल को किसी बल्लेबाज ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में शतक पूरा किया था। इसके बाद न्यूजीलैंड के क्रेग मै​कमिलन ने 24 अप्रैल 2002 को पाकिस्तान के खिलाफ वनडे मैच में रावलपिंडी में 105 रन बनाये थे। विश्व कप 2007 का सेमीफाइनल 24 अप्रैल को खेला गया था। सबीना पार्क किंग्सटन में खेले गये इस मैच में श्रीलंका के माहेला जयवर्धने ने न्यूजीलैंड के खिलाफ नाबाद 115 रन बनाये थे। टेस्ट क्रिकेट में आस्ट्रेलिया के मैथ्यू वेड ने 24 अप्रैल को सबसे पहले शतक पूरा किया था। इस विकेटकीपर बल्लेबाज ने वेस्टइंडीज के खिलाफ विंडसर पार्क रोसेउ में 24 अप्रैल 2012 की सुबह अपनी पारी 22 रन से आगे बढ़ाकर 106 रन तक पहुंचायी थी। यह वेड का टेस्ट क्रिकेट में पहला शतक था। 

Saturday, March 21, 2015

वनडे में अब दोहरे नहीं तिहरे शतक का इंतजार

                                                                                 धर्मेन्द्र पंत 
   एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पहला दोहरा शतक लगने में 39 साल से भी अधिक समय तक इंतजार करना पड़ा और अब आलम यह है कि एक महीने के अंदर दो दोहरे शतक लग गये। पिछले चार दशकों में 'पाजामा क्रिकेट' का रंग रूप, स्वरूप सब बदल गया है। इसमें विकेट गिरते हैं लेकिन रन ज्यादा बरसते हैं। आईसीसी खुश है और अब एसीबी (अब क्रिकेट आस्ट्रेलिया) भी इसे पाजामा क्रिकेट नहीं कहता है। बहरहाल यह अलग विषय है। हम तो वनडे में बड़ी व्यक्तिगत पारियों और शतकों की बात कर रहे थे। 
     पांच जनवरी 1971 को इंग्लैंड और आस्ट्रेलिया के बीच पहला एकदिवसीय मैच खेला गया था। इस मैच में इंग्लैंड के बायें हाथ के बल्लेबाज जान एल्ड्रिच ने 82 रन बनाये और इस तरह से वनडे में पहला बड़ा स्कोर का रिकार्ड उनके नाम पर दर्ज हो गया। यह रिकार्ड पूरे डेढ़ साल बना रहा क्योंकि इसके बाद अगला वनडे 24 अगस्त 1972 को खेला गया था जिसमें इंग्लैंड के ही डेनिस एमिस ने इस प्रारूप का पहला शतक जड़ा था। उन्होंने 103 रन बनाये। एक साल बाद रिकार्ड बायें हाथ के एक अन्य बल्लेबाज राय फ्रेडरिक्स के नाम पर दर्ज हो गया। उन्होंने वेस्टइंडीज की तरफ से इंग्लैंड के खिलाफ ओवल में 105 रन बनाये। इंग्लैंड के डेविड लायड ने इसे अगले साल यानि अगस्त 1974 में नाबाद 116 रन बनाये जबकि 1975 में खेले गये पहले विश्व कप में न्यूजीलैंड के ग्लेन टर्नर ने नाबाद 171 रन तक पहुंचा दिया। 
        पहली बार किसी बल्लेबाज ने वनडे में 150 रन के स्कोर को पार किया था। तब यह माना जा रहा था कि इस रिकार्ड तक पहुंचना मुश्किल होगा, क्योंकि मैच भी कम खेले जाते थे और शतक भी कम लगते थे। एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के जन्म के बाद से लेकर पहले दशक यानि सत्तर के दशक में नौ साल में केवल 24 शतक लगे। इनमें से सर्वाधिक दस शतक इंग्लैंड के बल्लेबाजों ने लगाये। भारत का तो कोई बल्लेबाज तिहरे अंक में भी नहीं पहुंच पाया था लेकिन अगला विश्व रिकार्ड एक भारतीय ने ही बनाया था। वह 18 जून 1983 का दिन था जबकि कपिल देव ने टन ब्रिज वेल्स में जिम्बाब्वे के खिलाफ विश्व कप मैच में नाबाद 175 रन की ऐतिहासिक पारी खेली थी। 
    अब मैच ज्यादा खेले जाने लगे थे और शतक भी बनने लगे थे। अस्सी के दशक में वनडे में कुल 134 सैकड़े बनाये गये। वेस्टइंडीज ने सर्वाधिक 39 जबकि आस्ट्रेलिया और पाकिस्तान ने 25.25 शतक लगाये थे। भारत की तरफ से भी 17 शतक लगे। सत्तर के दशक में जहां 150 से अधिक का केवल एक स्कोर बना वहीं अस्सी के दशक में ऐसे स्कोर की संख्या पांच पहुंच गयी। वेस्टइंडीज के विव रिचडर्स ने  एक साल में ही कपिल का रिकार्ड अपने नाम कर दिया था। उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ मैनचेस्टर में नाबाद 189 रन बनाये लेकिन दोहरे शतक तक नहीं पहुंच पाये। रिचर्ड्स ने इसके अलावा 181 रन की एक अन्य पारी खेली थी। उनके देश के डेसमंड हेन्स और इंग्लैंड के डेविड गावर भी 150 रन की संख्या को छूने में सफल रहे थे। 

बनने लगे बड़े स्कोर, टूटने लगे रिकार्ड 

       रिचर्ड्स ​के नाम पर 13 साल तक रिकार्ड बना रहा और आखिर में नब्बे के दशक में पाकिस्तान के सईद अनवर ने इसे तोड़ दिया। अनवर 21 मई 1997 को भारत के खिलाफ चेन्नई में जब दोहरे शतक से एक शाट दूर थे तब सचिन तेंदुलकर ने उन्हें आउट कर दिया। शायद भगवान ने भी पहला दोहरा शतक बनाने का रिकार्ड क्रिकेट के भगवान के नाम पर लिखा था। बहरहाल नब्बे के दशक में वनडे में कुल 315 शतक लगे जिनमें 15 स्कोर 150 रन या इससे अधिक के बने थे। दक्षिण अफ्रीका के गैरी कर्स्टन भी विश्व कप 1996 के एक मैच में नाबाद 188 रन तक पहुंचे थे। इस दशक में तेंदुलकर ने सर्वाधिक 24 जबकि अनवर ने 17 शतक लगाये थे। 
    अनवर का 194 रन के रिकार्ड तक पहुंचना बल्लेबाजों के लिये चुनौती बना रहा। नयी सदी के पहले दशक में यह रिकार्ड नहीं टूटा। इस दौरान 465 वनडे मैचों में 565 शतक लगे। 150 रन या इससे अधिक के 35 स्कोर बने। भारत ने 88, आस्ट्रेलिया ने 82, श्रीलंका ने 64, पाकिस्तान ने 62 और दक्षिण अफ्रीका की तरफ से 60 शतक लगे। रिकी पोंटिंग 23, सनथ जयसूर्या और तेंदुलकर 21.21 तथा क्रिस गेल और हर्शल गिब्स 19.19 शतक लगाने में सफल रहे लेकिन अनवर के रिकार्ड तक जिम्बाब्वे के चार्ल्स कावेंट्री ही पहुंच पाये। कावेंट्री ने असल में बांग्लादेश के खिलाफ बुलावायो में 16 अगस्त 2009 में नाबाद 194 रन बनाकर इसकी बराबरी की थी। अनवर ने राहत की सांस ली लेकिन नयी सदी के दूसरे दशक के शुरू में ही यानि 24 फरवरी 2010 को तेंदुलकर दोहरे शतक तक पहुंचने वाले बल्लेबाज बन गये। 
         तेंदुलकर ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ ग्वालियर में नाबाद 200 रन बनाये थे लेकिन यह तय था कि उनका यह रिकार्ड ज्यादा समय तक नहीं टिक पाएगा क्योंकि ​एकदिवसीय मैचों के नियम बल्लेबाजों के अनुकूल बना दिये गये। बाउंड्रीज अपेक्षाकृत छोटी बन गयी और बल्ले में भी इतना दमखम भर दिया गया कि छक्के जड़ना पहले की तरह मुश्किल नहीं रहा। तिस पर क्रिकेट का सबसे छोटा बेटा टी20 भी पैदा हो गया। वह अपने बड़ों को सिखाने लगा कि तेजी से रन कैसे बनाये जाते हैं। टेस्ट मैचों में परिणाम ज्यादा आने लगे तो वनडे को इससे सबसे ज्यादा फायदा हुआ। यहां रन बरसने लगे। अब आप ही देख लीजिए की पिछले लगभग पांच वर्षों में 289 मैचों में 385 शतक बन चुके हैं। इनमें 200 या इससे अधिक छह स्कोर शामिल हैं। मतलब पांच साल में छह दोहरे शतक। जिस 150 रन को कभी बल्लेबाज लक्ष्य लेकर चलते थे उस पांच वर्ष में 22 बल्लेबाजों ने 31 बार हासिल कर लिया है। भारत ने पिछले पांच साल में 60, दक्षिण अफ्रीका ने 58, श्रीलंका की तरफ से 55 शतक लग चुके हैं। विराट कोहली 21, हाशिम अमला 19, तिलकरत्ने दिलशान 17, एबी डिविलियर्स 16 और कुमार संगकारा ने 15 शतक लगाये हैं।
     इसलिए अब कहा जा रहा है कि वनडे में तिहरा शतक लगाना भी संभव है यह रोहित शर्मा भी जानते है कि उनका 264 रन का रिकार्ड किसी भी दिन टूट सकता है। रोहित से पहले वीरेंद्र सहवाग ने आठ दिसंबर 2011 को इंदौर में 219 रन बनाकर तेंदुलकर का रिकार्ड तोड़ा था। रोहित ने आस्ट्रेलिया के खिलाफ दो नवंबर 2013 को बेंगलूर में 209 रन बनाये लेकिन आखिर में वह इसके एक साल बाद 13 नवंबर 2014 को कोलकाता में सहवाग का रिकार्ड तोड़ने में सफल रहे। मार्टिन गुप्टिल ने नाबाद 237 रन बना दिये हैं। यह तय है कि कल कोई उनसे आगे निकलकर रोहित को पीछे छोड़ने की कोशिश करेगा और फिर 300 के लक्ष्य तक पहुंचना चाहेगा। जिस तरह से रन बरस रहे हैं उससे लगता है कि वनडे में तिहरा शतक भी इसी दशक में बन सकता है। 

Tuesday, February 24, 2015

पांच साल, 651 मैचों में बने पांच दोहरे शतक

                                                                    धर्मेन्द्र पंत 


पांच साल, पांच दोहरे शतक और चेहरों से झलकती खुशी
      एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पहले दोहरे शतक के लिये 39 साल और 50 दिन तथा 2962 मैचों का इंतजार करना पड़ा लेकिन इसके बाद पिछले पांच वर्ष और 651 मैचों के अंदर क्रिकेट के इस प्रारूप में पांच दोहरे शतक लग चुके हैं। यह भी संयोग है कि पहले चार दोहरे शतक भारतीय बल्लेबाजों ने लगाये। रोहित शर्मा दो बार ऐसा कारनामा कर चुके हैं जबकि अब क्रिस गेल पहले गैर भारतीय बल्लेबाज हैं जो इस सूची में शामिल हुए हैं। गेल ने विश्व कप में दोहरा शतक जड़ा और वह इस टूर्नामेंट में यह उपलब्धि हासिल करने वाले पहले बल्लेबाज हैं। 
       पहला एकदिवसीय मैच पांच जनवरी 1971 को खेला गया था और वनडे में पहला शतक 24 अगस्त 1972 को डेनिस एमिस ने लगाया था। इसके बाद तेंदुलकर के दोहरे शतक बनाने तक वनडे में 1051 शतक लगे लेकिन इनमें कोई भी दोहरा शतक नहीं था। दो बल्लेबाज ऐसे थे जो एक छक्का जड़ने पर 200 रन पर पहुंच जाते लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। पाकिस्तान के सईद अनवर 1997 में भारत के खिलाफ 194 रन बनाकर आउट हो गये जबकि 2009 में जिम्बाब्वे चार्ल्स कावेंट्री बांग्लादेश के खिलाफ इसी स्कोर पर नाबाद रहे थे। इस बीच वनडे क्रिकेट में कई धुरंधर बल्लेबाज देखे गये। मसलन वि​व रिचर्ड्स, सनथ जयसूर्या, मैथ्यू हेडन, कपिल देव, वीरेंद्र सहवाग, एडम गिलक्रिस्ट आदि। ये सभी 170 रन की संख्या के पार भी पहुंचे लेकिन दोहरे शतक से महरूम रहे। यहां तक कि तेंदुलकर ने जब पहला दोहरा शतक लगाया तो यही कहा गया कि उन्होंने इस मुकाम पर पहुंचने में देर लगायी। आखिर तब तक भारत की तरफ 172, आस्ट्रेलिया की तरफ से 152, पाकिस्तान की तरफ से 142, वेस्टइंडीज की तरफ से 130, श्रीलंका की तरफ से 106, इंग्लैंड की तरफ से 91, दक्षिण अफ्रीका की तरफ से 88 और न्यूजीलैंड की तरफ से 71 शतक वनडे क्रिकेट में लग चुके थे। तेंदुलकर ने यह मुकाम अपने 37वें जन्मदिन से दो महीने  पहले किया। 
    यह भी संयोग है कि तेंदुलकर ने 24 फरवरी 2010 को वनडे का पहला दोहरा शतक लगाया था और अब गेल ने इसके ठीक पांच साल बाद 24 फरवरी 2015 का विश्व कप का पहला और वनडे का पांचवां दोहरा शतक जड़ दिया। इन पांच वर्षों में वनडे में कुल 345 शतक लगे जिनमें पांच दोहरे शतक शामिल है। जाहिर है इस बीच मैचों की संख्या बढ़ी और उसी अनुपात में शतकों की संख्या में भी इजाफा हुआ। दक्षिण अफ्रीका ने इन पांच वर्षों में सर्वाधिक 55, भारत ने 54, श्रीलंका ने 44, आस्ट्रेलिया ने 33, इंग्लैंड ने 31, न्यूजीलैंड ने 29, वेस्टइंडीज ने 27 और पाकिस्तान ने 24 शतक लगाये। बांग्लादेश ने 11 और आयरलैंड ने 10 शतक लगाकर अपनी उपस्थिति दर्ज करायी लेकिन भारत के तीन बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर (200 नाबाद), वीरेंद्र सहवाग (219) और रोहित शर्मा (209 और 264) चार दोहरे शतक जमाने में सफल रहे। 
        असल में जिस दोहरे शतक को कभी वनडे में मुश्किल मुकाम माना जा रहा था, टी20 क्रिकेट के आगमन के बाद वह कुछ आसान बन गया। इस बीच बल्लेबाजों के पक्ष में बने क्षेत्ररक्षण और बाउंसर के नियमों ने भी मदद पहुंचायी। बल्ले के निचले भाग की मोटाई विशेषकर 'स्वीट स्पॉट' में भी ताकत भर दी गयी। इससे बड़े शाट खेलने में मदद मिली। गेल सरीखों से तो बहुत पहले से उम्मीद की जा रही थी लेकिन उनके बारे में भी यही कहा जाएगा कि वह देर से इस मुकाम तक पहुंचे। वैसे सिर्फ मददगार परिस्थितियों के दम पर ही दोहरे शतक तक नहीं पहुंचा जा सकता। इसके लिये संयम की भी जरूरत पड़ती है। जैसे कि आज गेल ने दिखाया। उन्होंने अपने पहले 50 रन 51 गेंदों और फिर शतक 105 गेंदों में पूरा किया। मतलब उन्होंने अगले 50 रन के लिये 54 गेंद खेली। वह 100 से 150 रन तक 21 गेंदों में और फिर 150 से 200 रन तक केवल 12 गेंद में पहुंचे। दोहरा शतक इसी तरह से पूरा किया जा सकता है। 
    तेंदुलकर ने भी जब पहला दोहरा शतक लगाया था तो उन्होंने पहले 100 रन 90 गेंद पर बनाये लेकिन अगले 100 रन के लिये उन्होंने केवल 57 गेंदें खेली थी। सहवाग ने अपनी लय एक जैसी बनाये रखी थी। उन्होंने शतक 69 गेंदों में पूरा किया जबकि अगले 100 रन बनाने के लिये भी 71 गेंदों का सामना किया था। रोहित ने जब 2013 में आस्ट्रेलिया के खिलाफ अपना पहला दोहरा शतक लगाया था तो उन्होंने बेहद धीमी शुरूआत की थी और पहले 100 रन के लिये 114 गेंद खेल ली थी लेकिन इसके बाद उन्होंने मौके की नजाकत को भांपते हुए तेजी दिखायी और अगली 42 गेंदों पर 200 रन पर पहुंच गये। उन्होंने श्रीलंका के खिलाफ 264 रन की रिकार्ड पारी के दौरान भी यही रणनी​ति अपनायी। रोहित ने तब शतक 100 गेंद पर पूरा किया लेकिन उनका दोहरा शतक 151 गेंदों पर बना। मतलब अगले शतक के लिये उन्होंने केवल 51 गेंदे खेली थी। 
         और हां अंत में ..... 24 फरवरी को वनडे में दो दोहरे शतक लग चुके हैं। क्या आप जानते हैं कि इस दिन पहला वनडे शतक किस बल्लेबाज ने बनाया था? आस्ट्रेलिया के रिकी ​पोंटिंग ने 2008 में भारत के खिलाफ सिडनी में। बाद में गौतम गंभीर ने भी इस मैच में सैकड़ा जड़ा था। संयोग देखिये कि इससे ठीक 100 साल पहले 24 फरवरी को टेस्ट मैचों में पहला शतक पूरा किया गया था। यह शतक 1908 में इंग्लैंड के जार्ज गुन ने बनाया था। 
     तो कैसी लगी आपको यह जानकारी। टिप्पणी जरूर करें। 

Sunday, December 21, 2014

धवन की चोट, कोहली और नंबर चार


                                                                                            धर्मेन्द्र मोहन पंत 

        स्थान : ब्रिस्बेन वूललुंगाबा, जो गाबा के नाम से लोकप्रिय है। भारतीय टीम चौथे दिन अपनी दूसरी पारी आगे बढ़ाने की तैयारियों में हैं। खेल शुरू होने में केवल दस मिनट बचे हैं। पिछले दिन के अविजित बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा तैयार हैं लेकिन उनके साथ तीसरे दिन स्टंप के समय अविजित रहे शिखर धवन अभ्यास के दौरान कलाई में लगी चोट से परेशान हैं। ऐसे में चौथे नंबर पर बल्लेबाजी के लिये उतरने वाले विराट कोहली को कहा जाता है कि वह पुजारा के साथ क्रीज पर उतरे। मामला गरमा जाता है। आखिर खेल से दस मिनट पहले यह क्यों तय किया गया कि कौन बल्लेबाजी के लिये उतरेगा? धवन तो पहले ही चोटिल हो गये थे और अभ्यास पिच को छोड़कर जल्द ही ड्रेसिंग रूम में भी लौट आये थे। असल में धवन ने कप्तान को अपनी स्थिति बताने में देर की। वह कप्तान को पहले ही बता देते तो संभवत: यह स्थिति पैदा ही नहीं होती। वह खेल शुरू होने से दस मिनट पहले आकर बताते हैं कि वह बल्लेबाजी के लिये नहीं उतर पाएंगे।

        कोहली खेलने के लिये तैयार हो गये लेकिन ड्रेसिंग रूम की गरमागर्म बहस का असर ​पिच पर दिखता है। मिशेल जानसन की गेंद को कोहली विकेट पर खेलकर तुरंत ही ड्रेसिंग रूम में लौट आते हैं। भारतीय पारी ताश के पत्तों की तरह बिखर गयी और शिखर धवन को ठीक एक घंटे पांच मिनट के बाद क्रीज पर उतरना पड़ा। स्वाभाविक था कि इतनी जल्दी उनकी कलाई ठीक नहीं हुई थी इसलिए उनके साहसिक फैसले की सराहना करनी होगी। लेकिन यदि वह पहले ही यह जोखिम ले लेते तो फिर बखेड़ा खड़ा नहीं होता। धवन ने अपनी पारी वहीं से आगे बढ़ायी जहां पर उन्होंने पहले दिन छोड़ी थी। मतलब उन्होंने उसी अंदाज में बल्लेबाजी की। कुछ करारे ड्राइव लगाये और एक दो दर्शनीय पुल भी किये। साफ लग रहा था कि उनकी कलाई की चोट गंभीर नहीं है। बस इसके कारण मामला गंभीर बन गया था। 
        अब नंबर चार के बल्लेबाज कोहली बात करते हैं। अब कोई बल्लेबाज स्वयं कह रहा हो कि वह क्रीज पर उतरने की स्थिति में नहीं है तो कप्तान या कोच उस पर दबाव भी नहीं बना सकते। कप्तान के पास यही विकल्प बचता है कि वह बल्लेबाजी लाइन अप में अगले नंबर के बल्लेबाज को तैयार होने के लिये कहे और महेंद्र सिंह धोनी ने भी यही किया। यह तो सचिन तेंदुलकर के संन्यास लेने के बाद ही तय हो गया था कि वर्षों तक जिस नंबर चार पर उनका आधिपत्य रहा उसके अगले उत्तराधिकारी विराट कोहली होंगे। कोहली ने भी इस नंबर की ​गरिमा को कम नहीं होने दिया। वह अब तक चौथे नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए 21 पारियों में 858 रन बना चुके हैं जिसमें चार शतक भी शामिल हैं। तेंदुलकर ने भी नंबर चार पर खेलते हुए पहली 21 पारियों में पांच शतक लगाये थे और कोहली उनसे ज्यादा पीछे नहीं हैं। यह अलग बात है कि तेंदुलकर ने किसी भी परिस्थिति में इस नंबर पर उतरने से कभी मना नहीं किया। अपने करियर में 329 में से 275 पारियां आखिर उन्होंने इस नंबर पर यूं ही नहीं खेली। 
        बल्लेबाजी लाइनअप में वनडाउन यानि नंबर तीन सबसे महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। कभी कभी तो उसे पहले ओवर में ही नयी गेंद का सामना करने के लिये आना पड़ता है। चौथे नंबर की भी कमो​बेश यही स्थिति है। उसे पारी को संवारना होता है और इसलिए इस नंबर पर खेलने वाले बल्लेबाज का धैर्यवान और अनुशासित होना जरूरी है। तेंदुलकर ने चार नंबर को नयी और सम्मानित पहचान दी है। माहेला जयवर्धने, जाक कैलिस, ब्रायन लारा, जावेद मियादाद, मार्क वॉ जैसे बल्लेबाज इस नंबर पर यूं ही सफल नहीं हुए। भारत की तरफ से कभी अपनी कलात्मक बल्लेबाजी के लिये मशहूर गुंडप्पा विश्वनाथ ने इस नंबर की शोभा बढ़ायी थी। उन्होंने भारत की तरफ से तेंदुलकर के बाद इस नंबर पर सर्वाधिक 124 पारियां खेली हैं, 5000 से अधिक रन बनाये और 12 शतक जड़े। मतलब कोहली को बड़ी जिम्मेदारी निभानी है। 
       कोहली जिस तरह के बल्लेबाज हैं उसे देखकर तो यही कहा जा सकता है कि तेंदुलकर ने नंबर चार को जो नयी पहचान दी है वह उसमें चार चांद लगाएंगे। वह हर तरह की चुनौती के लिये हमेशा तैयार दिखते हैं। फिर किसी भी तरह की बहस, भले ही वह क्षणिक हो, का नुकसान कोहली को ही होगा। उन्हें यह भी नहीं भूलना चाहिए कि वह भारत के भावी कप्तान हैं और अगले साल किसी भी समय उनके हाथों स्थायी तौर पर टीम की कमान दी जा सकती है। ऐसे में उन्हें भी कप्तान रहते हुई विषम परिस्थितियों में कुछ ऐसे फैसले करने पड़ सकते हैं जो किसी खिलाड़ी या टीम को नागवार गुजरे। प्रत्येक टीम गेम में ऐसा होता है। उम्मीद है कोहली इसे समझेंगे।