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Tuesday, April 7, 2015

आईपीएल : कुछ दिलचस्प आंकड़े

.... चेन्नई सुपरकिंग्स ने रविंद्र जडेजा को आलराउंडर के तौर पर करोड़ों रूपये देकर खरीदा था। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जडेजा को अब भी आईपीएल में पहले अर्धशतक का इंतजार है। उन्होंने आईपीएल में 94 मैचों में 1251 रन बनाये हैं और उनका उच्चतम स्कोर 48 रन है। दिलचस्प बात यह है कि जडेजा ने टी20 में ओवरआल 134 मैच खेले हैं लेकिन आज तक वह इस प्रारूप में अर्धशतक नहीं लगा पाये हैं।
.... गौतम गंभीर, विराट कोहली, रोबिन उथप्पा, महेंद्र सिंह धोनी, शिखर धवन, दिनेश कार्तिक उन बल्लेबाजों में शामिल हैं जिन्होंने आईपीएल में 2000 से अधिक रन बनाये हैं लेकिन उन्हें टी20 के इस टूर्नामेंट में अब भी पहले शतक का इंतजार है। आईपीएल में सर्वाधिक चार शतक क्रिस गेल ने लगाये हैं।
 .... आईपीएल में सर्वाधिक रन (3325) सुरेश रैना ने बनाये हैं लेकिन सर्वाधिक छक्कों का रिकार्ड क्रिस गेल के नाम पर हैं। गेल ने अब तक 192 छक्के लगाये हैं और आईपीएल में छक्कों का दोहरा शतक पूरा करने के लिये उन्हें केवल आठ छक्के चाहिए। लगता नहीं कि अगले सत्र में भी कोई दूसरा बल्लेबाज इस मुकाम पर पहुंच पाएगा क्योंकि गेल के बाद सर्वाधिक छक्के लगाने वाले बल्लेबाजों की सूची में दूसरे नंबर पर रैना (134 छक्के) हैं। गौतम गंभीर ने आईपीएल में सर्वाधिक 327 चौके लगाये हैं। दिल्ली रणजी टीम के उनके साथी वीरेंद्र सहवाग (322 चौके) उनसे थोड़े ही पीछे हैं।
.... सचिन तेंदुलकर ने आईपीएल तीन यानि 2010 में सर्वाधिक रन बनाने के लिये औरेंज कैप हासिल की थी लेकिन तब उन्होंने केवल तीन छक्के लगाये थे जो कि पिछले सात सत्र में ओरेंज कैप विजेता द्वारा लगाये गये सबसे कम छक्के हैं। तेंदुलकर ने हालांकि 86 चौके लगाये थे जो कि एक सत्र में सर्वाधिक चौकों का रिकार्ड है। दूसरी तरफ क्रिस गेल ने जब 2012 में ओरेंज कैप हासिल की थी तो उन्होंने 59 छक्के लगाये थे जो रिकार्ड है। गेल ने तब केवल 46 चौके लगाये थे यानि किसी ओरेंज कैप विजेता द्वारा लगाये गये सबसे कम चौके।
.... रैना एकमात्र ऐसे खिलाड़ी हैं जो आईपीएल में अब तक अपनी टीम की तरफ से सभी मैचों में खेले हैं। रैना शुरू से चेन्नई सुपरकिंग्स से जुड़े रहे हैं और उन्होंने इस टीम के लिये हर मैच में हिस्सा लिया है। रैना ने आईपीएल में सर्वाधिक 115 मैच खेल लिये हैं। धौनी 112 मैच के साथ दूसरे स्थान पर हैं। धौनी ने अपने सभी मैच कप्तान के रूप में खेले हैं जो कि रिकार्ड है। वह जिन तीन मैचों में नहीं खेल पाए उनमें रैना ने कप्तानी की थी जानकारी के लिये बतादें कि टी20 में धौनी ने रिकार्ड 185 मैचों में कप्तानी कर चुके हैं। गंभीर 106 मैच के साथ दूसरे स्थान पर हैं।
.... महेंद्र सिंह धौनी, सुरेश रैना (चेन्नई सुपरकिंग्स), विराट कोहली (रायल चैलेंजर्स बेंगलूर), हरभजन सिंह (मुंबई इंडियन्स), शेन वाटसन (राजस्थान रायल्स) और शान मार्श (किंग्स इलेवन पंजाब) ऐसे खिलाड़ी हैं जो पहले आईपीएल यानि 2008 से लेकर आज तक एक ही टीम से खेल रहे हैं। आठवें आईपीएल में भी ये खिलाड़ी इन्हीं टीमों से खेलते हुए नजर आएंगे।
.... पिछली बार जब सातवां आईपीएल शुरू हुआ था तो क्रिस गेल को टी20 में 6000 रन पूरा करने वाला पहला बल्लेबाज बनने के लिये छह रन की दरकार थी। इस बार वह इस प्रारूप में 7000 रन पूरे करने वाला पहला बल्लेबाज बन जाएंगे। इसके लिये उन्हें केवल 25 रन की दरकार है। गेल को टी20 में 500 छक्के लगाने वाला पहला बल्लेबाज बनने के लिये भी केवल 14 छक्कों की दरकार है। वेस्टइंडीज के उनके साथी कीरोन पोलार्ड (335 छक्के) दूसरे नंबर पर हैं लेकिन गेल से काफी पीछे हैं।
.... आईपीएल में सर्वाधिक 119 विकेट लेसिथ मालिंगा ने लिये हैं। अमित मिश्रा 102 विकेट के साथ दूसरे स्थान पर हैं। पीयूष चावला, हरभजन सिंह और आर विनयकुमार को आईपीएल में विकेटों का शतक पूरा करने के लिये दस से भी कम विकेट चाहिए।
.... टी20 क्रिकेट में सर्वाधिक 148 कैच लेने का रिकार्ड पोलार्ड के नाम पर है। अब तक कोई भी भारतीय क्षेत्ररक्षक कैच का सैकड़ा पूरा नहीं कर पाया है। रैना तीन कैच लपकते ही यह मुकाम हासिल कर लेंगे। पोलार्ड के अलावा डेविड हसी और ड्वेन ब्रावो ही टी20 में 100 से अधिक कैच लपक पाये हैं। रैना अभी चौथे स्थान पर हैं।


Monday, February 2, 2015

भारत की विश्व कप टीम में मध्यक्रम के महारथी

भारतीय टीम के नये 'मिस्टर भरोसेमंद' विराट कोहली
  
वह दिसंबर 2006 की सर्द रात थी जब तड़के तीन बजे दिल्ली के 18 वर्षीय बल्लेबाज विराट कोहली के पास घर से फोन आता है कि उसके पिता इस दुनिया में नहीं रहे। कर्नाटक के खिलाफ रणजी मैच में दिल्ली पर फालोआन का संकट मंडरा रहा था और कोहली पिछले दिन 40 रन बनाकर खेल रहे थे। वह अपनी पारी आगे बढ़ाये या नहीं इसके लिये कोहली आस्ट्रेलिया दौरे पर गये अपने कोच राजकुमार शर्मा को फोन करता है और उनकी सलाह पर बल्लेबाजी जारी रखने का फैसला करता है। कोहली 90 रन बनाकर दिल्ली को फालोआन से बचाता है और उसके बाद सीधे अपने पिता की अंत्येष्टि में शामिल होने के लिये चला जाता है। कोहली की मां के शब्दों में, ''विराट उस दिन के बाद कुछ बदल गया। रातों रात वह परिपक्व बन गया। वह प्रत्येक मैच को गंभीरता से लेना लगा। उसे बेंच पर बैठना कतई पसंद नहीं था।''
     कोहली यानि वह शख्स जो आक्रामक क्रिकेट खेलना पसंद करता है। मैदान पर अपनी भावनाओं को खुलकर इजहार करने के कारण आलोचकों के निशाने पर रहता है और जिस पर दंभी होने के आरोप भी लगते रहते हैं लेकिन इन सबसे बढ़कर वह एक बेहतरीन बल्लेबाज है जो हर तरह का शाट खेलने में माहिर है और किसी भी तरह के आक्रमण के सामने और कैसी भी परिस्थितियों में रन बनाना जानता है। दबाव में अच्छा प्रदर्शन करने में कोहली का सानी नहीं। लेग साइड पर उनके शाट देखने लायक होते हैं। इसलिए तो वह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में दनादन शतक ठोक रहे हैं और रनों का अंबार लगा रहे हैं। कोहली अभी केवल 25 साल के हैं और उनके नाम पर वनडे में 150 मैचों में 6232 रन दर्ज हैं। कोहली ने ये रन 51.50 की औसत से बनाये हैं जिसमें 21 शतक और 33 अर्धशतक शामिल हैं। वह वनडे में सबसे तेज 6000 रन पूरे करने वाले बल्लेबाज हैं।
     यही कोहली आज भारतीय​ क्रिकेट का अहम अंग है। यहां तक महेंद्र सिंह धौनी के टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद वह टेस्ट टीम के कप्तान बन चुके हैं और आने वाले समय में उन्हें तीनों प्रारूपों की कप्तानी सौंपी जा सकती है। कोहली के नेतृत्व में भारत ने 2008 में अंडर . 19 विश्व कप जीता और 2011 में भारत को वनडे का विश्व चैंपियन​ बनाने में भी उन्होंने अहम भूमिका निभायी। कोहली ने भारत के पहले मैच में ही शतक जड़ा और फिर फाइनल में भी 35 रन की महत्वपूर्ण पारी खेली थी। इसके बाद आस्ट्रेलियाई दौरे में जब भारत के कई दिग्गज बल्लेबाज रन बनाने के लिये जूझ रहे थे तब उन्होंने एडिलेड में 116 रन की जोरदार पारी खेलकर टेस्ट मैचों में अपना स्थान पक्का किया था। इसके बाद उन्होंने त्रिकोणीय श्रृंखला में भी शानदार खेल दिखाया। हाल में आस्ट्रेलिया के खिलाफ चार टेस्ट मैचों की श्रृंखला में कोहली ने चार शतकों की मदद से 692 रन बनाये। इसके बाद त्रिकोणीय श्रृंखला में उनका बल्लेबाजी क्रम बदलना भारत का महंगा पड़ा और वह अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाये लेकिन यह तय है कि विश्व कप में भारतीय बल्लेबाजी का दारोमदार उन पर ही टिका रहेगा। कोहली पिछली बार की विश्व कप विजेता टीम के सदस्य थे। कोहली ने विश्व कप 2011 में सभी नौ मैच खेले थे जिसमें उन्होंने 35.25 की औसत से 282 रन बनाये थे। इसमें एक शतक और एक अर्धशतक शामिल है।

सुरेश रैना : आस्ट्रेलिया में सुधारना होगा रिकार्ड 
      
पिछले लगभग दस साल से भारतीय एकदिवसीय टीम के अहम अंग रहे हैं सुरेश रैना। भारतीय टीम के पूर्व कोच ग्रेग चैपल उन्हें बेहद प्रतिभाशाली मानते थे लेकिन बायें हाथ का यह बल्लेबाज शुरूआती वर्षों में अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतर पाया। यह कह सकते हैं कि 2005 में पदार्पण के बाद अगले तीन चार वर्ष तक बड़ी पारी खेलने के लिये तरसते रहे।
       रैना के बारे में शुरू से कहा जाता रहा कि वह शार्ट पिच गेंदों को सही तरह से नहीं खेल पाते लेकिन इसके बावजूद अपने जज्बे, धाराप्रवाह बल्लेबाजी करने की कला और चपल क्षेत्ररक्षण के कारण उन्होंने भारतीय टीम में अपनी जगह बनाये रखी। सुविधाओं के लिये तरसते उत्तर प्रदेश के स्पोर्ट्स हास्टल से निकले बायें हाथ का यह बल्लेबाज हालांकि खाली स्थानों से गेंद निकालकर रन बनाने में माहिर है। पाकिस्तान में 2008 में खेले गये एशिया कप में रैना ने दो शतक जड़कर बड़ी पारियां खेलने की शुरूआत की थी। उन्हें 2010 में टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण का मौका मिला और पहले मैच में ही शतक बनाने में सफल रहे लेकिन यहां भी वह अपनी फार्म को बनाये रखने में नाकाम रहे और पिछले साढ़े चार साल में उनके नाम पर केवल 18 टेस्ट मैच दर्ज हैं।
            रैना के साथ भी अभी फार्म की दिक्कत जुड़ गयी है। आस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट श्रृंखला में उन्हें केवल एक टेस्ट मैच खेलने का मौका मिला जिसकी दोनों पारियों में वह खाता नहीं खोल पाये। इसके बाद त्रिकोणीय श्रृंखला के शुरू में उन्होंने मेलबर्न में 51 रन की पारी खेली लेकिन अगली दो पारियों में वह एक . एक रन ही बना पाये। मध्यक्रम में कोहली के बाद रैना को सबसे भरोसेमंद बल्लेबाज माना जा रहा है लेकिन यदि पिछले कुछ मैचों की तरह इनाम में अपने विकेट देते रहे तो भारत की मुश्किलें बढ़ जाएंगी। रैना को संयम बरतकर खेलने की जरूरत है, क्योंकि यह सभी जानते हैं कि जब वह क्रीज पर टिक जाते हैं और उनका बल्ला चलने लगता है तो फिर गेंद लगातार सीमा रेखा के दर्शन करती है।
      उत्तर प्रदेश के यह बल्लेबाज विश्व कप 2011 की चैंपियन टीम ​का हिस्सा था। हालांकि तब उन्हें केवल चार मैच खेलने का मौका मिला था जिसमें उन्होंने 74 रन बनाये थे। रैना ने विश्व कप से पहले तक कुल 207 वनडे मैच खेले हैं जिसमें उन्होंने 35.44 की औसत से 5104 रन बनाये हैं। उनके नाम पर चार शतक और 33 अर्धशतक दर्ज हैं। इस 28 वर्षीय बल्लेबाज का हालांकि आस्ट्रेलिया में रिकार्ड आकर्षक नहीं है जहां उन्होंने 12 मैचों में 23.50 की औसत से 235 रन बनाये हैं।

अंबाती रायुडु : चयन सही साबित करने की चुनौती 
  
वीवीएस लक्ष्मण और हरभजन सिंह की नजर में अंबाती रायुडु विशेष प्रतिभा का धनी है लेकिन वह अभी तक अपनी प्रतिभा के साथ पूरी तरह न्याय नहीं कर पाये हैं। उन्होंने शुरू से बहुत जल्दी परिणाम हासिल करने के प्रयास में अपना करियर भी दांव पर लगा दिया था। अपने करियर के शुरू में कभी कोच तो कभी अंपायरों के साथ मतभेदों के कारण वह परेशानी में पड़े और ऐसे में जिस बल्लेबाज को प्रतिभाशाली माना जाता था उसका करियर दांव पर लग गया। इंडियन क्रिकेट लीग ने रही सही कसर पूरी कर दी। रायुडु इससे जुड़ गये और इससे उनका राष्ट्रीय टीम में जगह बनाने का सपना भी टूटता हुआ दिखने लगा। आखिर में बीसीसीआई ने आईसीएल से जुड़े खिलाड़ियों को राहत दी और उन्हें वापसी का मौका दिया। रायुडु ने हैदराबाद के बजाय बड़ौदा से खेलना शुरू कर दिया।

    अपनी प्रवाहमय बल्लेबाजी और स्ट्रोक लगाने में कुशलता के कारण रायुडु को आखिर 2013 में जिम्बाब्वे दौरे में भारत की तरफ से खेलने का मौका मिल गया। उन्होंने अपने पहले मैच में ही अर्धशतक जड़कर शानदार आगाज किया लेकिन इसके बाद अंदर बाहर होते रहे। पिछले साल श्रीलंका के खिलाफ अहमदाबाद में नाबाद 121 रन बनाकर उन्होंने विश्व कप टीम में अपनी जगह सुनिश्चित की। आस्ट्रेलिया में त्रिकोणीय श्रृंखला में वह अवसरों का सही तरह से फायदा उठाने में नाकाम रहे। तीनों मैचों में क्रीज पर समय बिताने के बाद वह 23, 23 और 12 रन बनाकर पवेलियन लौटे। विश्व कप में मध्यक्रम में उन्हें नाजुक मौकों पर बल्लेबाजी करनी पड़ सकती है और 29 वर्षीय रायुडु को इसके लिये तैयार रहना चाहिए। रायुडु विकेटकीपिंग भी कर लेते हैं और यदि किसी मैच में धौनी नहीं खेल पाते हैं कि तो उन्हें विकेट के आगे ही नहीं विकेट के पीछे भी अपना कौशल दिखाना होगा। जिम्मेदारियां काफी हैं देखना है कि रायुडु उस पर खरा उतर पाते हैं या नहीं। वह पहली बार विश्व कप में खेलेंगे। उन्हें अब तक केवल 27 वनडे मैच खेलने का मौका मिला जिसमें उन्होंने 41.27 की औसत से 743 रन बनाये हैं। रायुडु के नाम पर एक शतक और पांच अर्धशतक भी दर्ज हैं। 
                                                                                  धर्मेन्द्र मोहन पंत 

Monday, January 12, 2015

डाउन अंडर में विश्व कप के भारतीय बल्लेबाज

                                                                                       धर्मेन्द्र 
     विश्व कप के लिये भारत ने जो टीम चुनी है उसकी बल्लेबाजी मजबूत मानी जा रही है। गेंदबाजी कमजोर पक्ष है लेकिन हम यहां पर केवल बल्लेबाजों तथा आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में उनके प्रदर्शन पर गौर करेंगे। यह आंकड़ों की बिसात है जो समय, परिस्थितियों और फार्म के हिसाब से बदल भी सकती है लेकिन भारतीय बल्लेबाजों के लिये 'डाउन अंडर' यानि आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की सरजमीं हमेशा चुनौती रही है और आंकड़ों पर गौर करने से भी साबित हो जाता है कि विशेषकर एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट यानि वनडे में कप्तान महेंद्र सिंह धौनी और विराट कोहली को छोड़कर विश्व कप टीम के बाकी बल्लेबाज 'डाउन अंडर' में रन बनाने के लिये जूझते रहे हैं। आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की पिचें तेज होती हैं और उनमें पर्याप्त उछाल रहती है। भारत के सुरेश रैना और रोहित शर्मा जैसे बल्लेबाजों को इस तरह की पिचें रास नहीं आती हैं। यदि भारत को विश्व कप का खिताब बरकरार रखना है तो इन बल्लेबाजों को खुद को साबित करना होगा और अपने पिछले रिकार्ड में सुधार करना होगा।
रिकार्ड में सुधार करना होगा धवन, रोहित और रैना को 
     
       चलिये अब आंकड़ों की जुबानी कहानी आगे बढ़ाते हैं। बल्लेबाजी क्रम से ही आगे बढ़ते हैं। भारत के लिये अभी शिखर धवन और रोहित शर्मा वनडे में पारी का आगाज कर रहे हैं। इन दोनों ने आस्ट्रेलिया के खिलाफ हाल में समाप्त हुई टेस्ट श्रृंखला में निराशाजनक प्रदर्शन किया था और 'डाउन अंडर में उनका ओवरआल रिकार्ड भी प्रभावशाली नहीं है।  आस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट श्रृंखला की छह पारियों में केवल 167 रन बनाने वाले धवन ने विश्व कप के मेजबान देशों यानि आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में अब तक केवल कीवियों की धरती पर चार वनडे खेले हैं जिनमें वह बुरी तरह नाकाम रहे। इन चार मैचों में उन्होंने 20.25 की औसत से 81 रन बनाये जिसमें उनका उच्चतम स्कोर 32 रन रहा। उनके साथी सलामी बल्लेबाज रोहित को जरूर 22 वनडे खेलने का मौका मिला है जिनमें उन्होंने 29.52 की औसत से 502 रन बनाये हैं। वनडे में दो दोहरे शतक लगाने वाले रोहित को 'डाउन अंडर' में अब भी पहले शतक का इंतजार है। भारत को लीग चरण में आस्ट्रेलिया में चार और न्यूजीलैंड में दो मैच खेले हैं। इसका जिक्र इसलिए किया जा रहा है क्योंकि रोहित ने आस्ट्रेलिया में जो 15 वनडे खेले हैं उनमें वह केवल 26.16 की औसत से ही रन बना पाये हैं।
        अब बात करते हैं विराट कोहली की जिन्होंने आस्ट्रेलिया के खिलाफ चार टेस्ट मैचों में 692 रन बनाकर साबित कर दिया कि उन पर परिस्थितियों का कोई प्रभाव नहीं पड़ता और वह दुनिया के किसी भी तरह की पिच पर रन बनाने में सक्षम हैं। कोहली हर तरह के प्रारूप में आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में भी उतने ही सफल रहे हैं जितने की भारत में। भारत की टेस्ट टीम के नये कप्तान ने 'डाउन अंडर' में तीनों प्रारूपों में मिलकर 1923 रन बनाये हैं और उनका औसत 58.27 है। वनडे में उन्होंने दोनों देशों में अब तक जो 13 मैच खेले हैं उनमें 55.33 की औसत से 664 रन बनाये हैं। कोहली ने इन दोनों देशों की सरजमीं पर अब तक वनडे में एक एक शतक लगाया है।
     
कोहली और धौनी : आस्ट्रेलिया व न्यूजीलैंड में भी खूब चला है बल्ला
       कोहली यदि नंबर तीन पर उतरेंगे तो संभवत: नंबर चार की जिम्मेदारी अजिंक्य रहाणे संभालेंगे जो अच्छी फार्म में चल रहे हैं। वह अच्छे तकनीक वाले बल्लेबाज हैं और आस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट श्रृंखला में 399 रन बनाकर उन्होंने इसे साबित भी कर दिया है। रहाणे का  'डाउन अंडर' में वनडे रिकार्ड हालांकि बहुत खराब है और वह इसमें जरूर सुधार करने की कोशिश करेंगे। रहाणे ने अब तक आस्ट्रेलिया में कोई वनडे नहीं खेला है। उन्होंने पांच मैच न्यूजीलैंड की सरजमीं पर खेले जिसकी पांच पारियों में वह केवल 51 रन बना पाये। इनमें से चार पारियों में वह दोहरे अंक में भी नहीं पहुंच पाये थे जबकि एक बार उन्होंने 36 रन की पारी खेली थी।    
          बल्लेबाजी क्रम में नंबर पांच सुरेश रैना के लिये सुरक्षित है जिन्हें हाल में सिडनी में पहली बार 'डाउन अंडर' में पहला टेस्ट मैच खेलने का मौका मिला और वह दोनों पारियों में कुल चार गेंद का सामना कर पाये और खाता खोलने में भी नाकाम रहे। रैना ने इन दोनों मेजबान देशों में अब तक कुल 16 वनडे मैच खेले हैं जिनमें 32.58 की औसत से 391 रन बनाये हैं। वह इन 16 मैचों की 15 पारियों में केवल एक बार 50 रन के पार पहुंच पाये। आस्ट्रेलिया की सरजमीं पर तो वह आठ पारियों में केवल 182 रन ही बना पाये हैं और उनका उच्चतम स्कोर नाबाद 40 रन है। मतलब यदि रैना आस्ट्रेलिया में त्रिकोणीय श्रृंखला या विश्व कप में अर्धशतक जड़ते हैं तो यह उनका आस्ट्रेलियाई धरती पर पहला पचासा होगा। मध्यक्रम के किसी बल्लेबाज या रहाणे के शीर्ष क्रम में खेलने की स्थिति में अंबाती रायुडु को मौका मिल सकता है। रायुडु ने अब तक आस्ट्रेलिया में अब तक कोई मैच नहीं खेला है। न्यूजीलैंड में उन्हें दो वनडे खेलने का मौका मिला जिसमें उन्होंने 57 रन बनाये हैं।
       विकेटकीपर बल्लेबाज और टीम के कप्तान धौनी आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की सरजमीं पर टेस्ट मैचों में भले ही अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाये लेकिन वनडे में उन्होंने वहां भी अपना जलवा जमकर बिखेरा है। रिकार्ड के लिये बतादें कि टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले चुके धौनी ने लंबी अवधि के प्रारूप में इन दोनों देशों में 13 टेस्ट मैच की 24 पारियों में 27.76 की औसत से 583 रन बनाये। जिसमें उनका उच्चतम स्कोर 68 रन है। वनडे की कहानी इसके ठीक उलट है हालांकि इस प्रारूप में भी धौनी को अभी 'डाउन अंडर' में पहले शतक का इंतजार है। असल में धौनी अब तक इन दोनों देशों में किसी भी प्रारूप में शतक नहीं जड़ पाये हैं। वनडे की बात करें तो धौनी ने अब तक विश्व कप के मेजबान देशों की धरती पर 27 मैच खेले हैं जिनमें उन्होंने 67.20 के प्रभावशाली औसत से 1008 रन बनाये हैं। इनमें नौ अर्धशतक शामिल हैं। आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड दोनों में उनका वनडे औसत 60 से ऊपर है।
         भारतीय टीम में चुने गये दो आलराउंडरों की चर्चा किये बिना भारतीय बल्लेबाजों के आंकड़ों की यह
बिन्नी और जडेजा को सही साबित करना होगा चयन 
कहानी अधूरी रहेगी। रविंद्र जडेजा ने इन दोनों देशों में 13 वनडे की 12 पारियों में 27.33 की औसत से 246 रन बनाये हैं। न्यूजीलैंड की सरजमीं पर उन्होंने ठीकठाक प्रदर्शन (पांच मैचों में 145 रन) किया है लेकिन आस्ट्रेलिया की धरती पर उनका बल्ला अभी तक नहीं चल पाया है। जडेजा ने आस्ट्रेलिया में जो आठ वनडे मैच खेले हैं उनमें वह केवल 101 रन बना पाये हैं और उनका औसत 16.83 है। यहां उनका उच्चतम स्कोर नाबाद 24 रन है। भारत के दूसरे आलराउंडर स्टुअर्ट बिन्नी ने अब तक अंतरराष्ट्रीय मैचों में आस्ट्रेलियाई पिचों का स्वाद नहीं चखा है। न्यूजीलैंड में उन्होंने एक वनडे खेला है जिसमें उन्हें बल्लेबाजी का मौका नहीं मिला। पिछले साल हैमिल्टन में खेले गये इस मैच में धौनी ने उनके बजाय आर अश्विन को पहले बल्लेबाजी के लिये भेज दिया था। इसके बाद बिन्नी से केवल एक ओवर की गेंदबाजी करवायी गयी जिसमें उन्होंने आठ रन दिये थे। इसके उलट रायुडु को तीन ओवर दिये गये थे। आप इसका कुछ भी मतलब निकाल सकते हैं। मैं तो आंकड़ों से खेलता हूं और मेरा इस पारी में प्रदर्शन कैसा रहा इसका फैसला आप पर छोड़ता हूं। इच्छा करे तो प्रतिक्रिया जरूर दें।
     (सभी आंकड़े 12 जनवरी 2015 तक के हैं)